Iran Protest Death Toll: 36,000 Killed by Khamenei’s Forces on January 8-9 Night

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ईरान में जनवरी की शुरुआत में हुए सरकार विरोधी प्रदर्शनों को लेकर बेहद गंभीर और चौंकाने वाले दावे सामने आए हैं. विपक्ष समर्थित ईरानी न्यूज वेबसाइट ईरान इंटरनेशनल ने रविवार को अपनी रिपोर्ट में कहा कि 8 और 9 जनवरी को हुए दमन में ईरानी शासन द्वारा 36 हजार से अधिक लोगों को मौत के घाट उतार दिया गया.

ईरान इंटरनेशनल के मुताबिक, यह आंकड़ा “क्लासिफाइड दस्तावेजों, फील्ड रिपोर्ट्स, मेडिकल स्टाफ, चश्मदीदों और पीड़ित परिवारों के बयानों” के आधार पर तैयार किया गया है. रिपोर्ट में दावा किया गया है कि यह दो दिनों में हुआ अब तक का सबसे बड़ा और सबसे खूनी नागरिक जनसंहार है, जो सड़क पर हुए विरोध प्रदर्शनों के दौरान दर्ज किया गया.

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रिपोर्ट के अनुसार, अधिकतर हत्याएं इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) और उससे जुड़ी बसीज मिलिशिया द्वारा की गईं. इसके अलावा इराक और सीरिया से लाए गए प्रॉक्सी लड़ाकों का भी इस्तेमाल किया गया. ईरान के आंतरिक मंत्रालय से जुड़े सूत्रों ने बताया कि प्रांतीय सुरक्षा परिषदों की 20 जनवरी की रिपोर्ट में मरने वालों की संख्या 30 हजार से अधिक बताई गई थी.

अलग-अलग रिपोर्ट में अलग-अलग मौत के आंकड़े

ईरान इंटरनेशनल ने यह भी दावा किया कि 21 जनवरी को संसद की राष्ट्रीय सुरक्षा और विदेश नीति समिति के सामने पेश की गई एक रिपोर्ट में मृतकों की संख्या 27,500 से अधिक बताई गई. वहीं सुप्रीम नेशनल सिक्योरिटी काउंसिल से जुड़े दो सूत्रों ने कहा कि IRGC की दो अलग-अलग रिपोर्ट्स में यह आंकड़ा 33 हजार और 36,500 से ज्यादा बताया गया है.

सुप्रीम लीडर खामेनेई के अंडरग्राउंड होने का दावा

इसी बीच, रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि बढ़ते अमेरिकी हमले के खतरे के आकलन के बाद ईरान के सुप्रीम लीडर अली खामेनेई तेहरान में एक विशेष अंडरग्राउंड शेल्टर में चले गए हैं. यह सुविधा सुरंगों से जुड़ा एक मजबूत बंकर बताई जा रही है.

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रेजा पहलवी की अपील, चुनाव कराने की मांग

दूसरी ओर, ईरान के भीतर चल रहे विरोध प्रदर्शनों के समर्थन में ऑस्ट्रेलिया, कनाडा, यूरोप और अमेरिका समेत कई देशों में प्रदर्शन और मार्च आयोजित किए जाने की तैयारी है. ईरान के निर्वासित क्राउन प्रिंस रेजा पहलवी ने भी बयान दिया है कि वह इस्लामिक रिपब्लिक को हटाने और ईरान में धर्मनिरपेक्ष लोकतंत्र स्थापित करने की प्रक्रिया में मदद के लिए तैयार हैं, बशर्ते स्वतंत्र चुनाव कराए जाएं.

मिडिल ईस्ट के देशों के लिए कई उड़ान रद्द

तनाव के बीच कई अंतरराष्ट्रीय एयरलाइंस जैसे लुफ्थांसा, एयर फ्रांस, केएलएम और स्विस ने इजरायल, यूएई और सऊदी अरब के लिए अपनी उड़ानें रद्द कर दी हैं. वहीं संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार परिषद ने भी ईरानी सुरक्षा बलों की कार्रवाई की कड़ी निंदा करते हुए प्रस्ताव पारित किया है.

—- समाप्त —-

  1. Short Description:
    ईरान में हालिया प्रदर्शनों के दौरान 36,000+ नागरिकों की हत्या का गंभीर आरोप लगाया जा रहा है, जिससे अंतर्राष्ट्रीय तनाव और बाजार अस्थिरता बढ़ रही है।

  2. Read Time:
    4 मिनट 15 सेकंड

  3. Main Article:

    ईरान में हाल ही में हुए सरकार विरोधी प्रदर्शनों को लेकर अत्यंत गंभीर आरोप सामने आए हैं। विपक्ष-समर्थित मीडिया आउटलेट ईरान इंटरनेशनल के अनुसार, जनवरी महीने की शुरुआत में हुए हिंसक दमन में 36,000 से अधिक लोगों को मार दिया गया। यह आंकड़ा क्लासीफाइड दस्तावेजों, फील्ड रिपोर्ट्स और चश्मदीदों के बयानों पर आधारित है। रिपोर्ट के मुताबिक, ईरानी सुरक्षा बलों और उनसे जुड़ी मिलिशिया ने इस नागरिक जनसंहार को अंजाम दिया, जिसमें इराक और सीरिया से लाए गए प्रॉक्सी लड़ाकों का भी इस्तेमाल किया गया। इस घटना ने मध्य पूर्व तनाव को चरम पर पहुंचा दिया है और वैश्विक समुदाय की प्रतिक्रिया तेज हो गई है। संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार परिषद ने ईरान की कार्रवाई की कड़ी निंदा करते हुए एक प्रस्ताव भी पारित किया है।

    इस बढ़ते संकट के कारण अंतर्राष्ट्रीय बाजारों में अस्थिरता देखी जा रही है। ईरान गल्फ टेंशन के बीच कई प्रमुख अंतरराष्ट्रीय एयरलाइंस जैसे एयर फ्रांस, लुफ्थांसा और केएलएम ने इजरायल, संयुक्त अरब अमीरात और सऊदी अरब के लिए उड़ानें रद्द कर दी हैं, जिससे वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला और व्यापार मार्गों पर दबाव बढ़ने की आशंका है। साथ ही, ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई के अमेरिकी हमले के खतरे के मद्देनजर एक अंडरग्राउंड बंकर में चले जाने की खबरें जियोपोलिटिकल जोखिम को और बढ़ा रही हैं। निर्वासित ईरानी क्राउन प्रिंस रेज़ा पहलवी ने देश में स्वतंत्र चुनाव कराने और धर्मनिरपेक्ष लोकतंत्र स्थापित करने की मांग की है, जिससे देश के भविष्य को लेकर अनिश्चितता बनी हुई है।

    इन घटनाक्रमों का सीधा प्रभाव वैश्विक ऊर्जा बाजार और निवेशक सेंटीमेंट पर पड़ रहा है। कच्चे तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव और ईरान संकट के कारण निवेशक सुरक्षित संपत्तियों की ओर रुख कर रहे हैं। वित्तीय बाजारों के लिए, मध्य पूर्व में बढ़ता अस्थिरता का जोखिम एक प्रमुख चिंता का विषय बना हुआ है, क्योंकि इस क्षेत्र में कोई भी बड़ी घटना वैश्विक आर्थिक स्थिरता को प्रभावित कर सकती है।

  4. Short Summary:
    ईरान में प्रदर्शनकारियों के दमन में हजारों मौतों के आरोपों ने अंतर्राष्ट्रीय तनाव बढ़ा दिया है, जिससे क्षेत्रीय अस्थिरता, एयरलाइन उड़ानों में रुकावट और वैश्विक बाजारों पर दबाव पैदा हो रहा है। यह स्थिति ऊर्जा बाजार और निवेशकों के लिए निरंतर जोखिम बनी हुई है।

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